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29 वर्ष पुराने पुलिस कस्टडी मौत मामले में ऐतिहासिक फैसला, डॉ. के.के. जैन समेत तीन दोषी करार

Hamari sevaye

वाराणसी। पुलिस हिरासत में हुई मौत के 29 वर्ष पुराने बहुचर्चित मामले में वाराणसी की विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण) अमित कुमार तिवारी की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. के.के. जैन समेत तीन लोगों को दोषी ठहराया है। न्यायालय ने सेवानिवृत्त दरोगा नरेंद्र प्रताप सिंह, सेवानिवृत्त दरोगा राधेश्याम सिंह और पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक डॉ. के.के. जैन को विभिन्न धाराओं में दोषी पाते हुए कारावास एवं जुर्माने की सजा सुनाई।

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अदालत ने डॉ. के.के. जैन को पांच वर्ष के कारावास व 40 हजार रुपये जुर्माना, नरेंद्र प्रताप सिंह को 10 वर्ष के कारावास व 31 हजार रुपये जुर्माना तथा राधेश्याम सिंह को छह माह के कारावास व एक हजार रुपये जुर्माना की सजा दी। साथ ही जुर्माने की 50 प्रतिशत राशि मृतक के परिजनों को देने का आदेश दिया गया।

मामला जंसा थाना क्षेत्र के बखरिया गांव निवासी राजेंद्र प्रसाद सिंह की मृत्यु से जुड़ा है। वर्ष 1997 में बेटे की दवा लेने वाराणसी आए राजेंद्र की बस में विवाद के बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था। आरोप है कि हिरासत में प्रताड़ना के चलते उनकी मौत हो गई, जबकि पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला बताया।

बाद में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप पर सीबीसीआईडी जांच में कई गंभीर तथ्य सामने आए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खामियां पाई गईं और आत्महत्या के दावों पर भी सवाल उठे। मृतक का अंतिम संस्कार परिजनों को सूचना दिए बिना कर दिया गया था।

करीब तीन दशक तक चले इस मुकदमे में 12 गवाहों की गवाही, सीबीसीआईडी जांच रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया। इस फैसले को पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों के मामलों में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।

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