

हाईकोर्ट के जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने दोषी की अपील खारिज कर दी है. साथ ही ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया है, जिसमें 20 साल की सजा सुनाई गई थी. 1 सितंबर को जारी आदेश में कहा गया कि जब यौन इरादे से मुंह से प्राइवेट पार्ट को छुआ जाता है, तो इस हरकत को POCSO एक्ट की धारा 3(D) के तहत पेनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट माना जाएगा. यह धारा 4 के दंड के योग्य है. इसलिए इस केस में स्पेशल जज का यह निष्कर्ष सही है कि आरोपी ने इस एक्ट की धारा 5(1) और 6 के तहत क्राइम किया है.
