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तुकाराम मुंढे का इंस्टाग्राम पर जलवा, फडणवीस-शिंदे को भी पछाड़ा, कैसे बने सोशल मीडिया के चहेते IAS अफसर?

Hamari sevaye

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महाराष्ट्र के फेमस आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे को अब कौन नहीं जानता है. उनके एक्शन से पूरे महाराष्ट्र में हड़कंप है. वह महाराष्ट्र के एफडीए यानी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कमिशनर हैं. तुकाराम मुंढे सोशल मीडिया पर अपनी अलग पहचान बना चुके हैं. सोशल मीडिया पर उनका जलवा और दबदबा है. उन्होंने तो देवेंद्र फड़णवीस और एकनाथ शिंदे तक को पछाड़ दिया है. जी हां, इंस्टाग्राम पर उनके फॉलोअर्स की संख्या महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से भी ज्यादा हो गई है. इतना ही नहीं, उनके इंस्टाग्राम पोस्ट पर लोगों की सक्रियता भी इन बड़े राजनीतिक नेताओं के मुकाबले काफी ज्यादा है.

जी हां, अगस्त 2026 में जारी आंकड़े बताते हैं कि सोशल मीडिया पर तुकाराम मुंढे की पॉपुलारिटी यानी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है. इसकी एक बड़ी वजह महाराष्ट्र के FDA कमिश्नर के तौर पर उनकी सख्त प्रशासनिक कार्यशैली है. अगस्त 2026 में जारी आंकड़ों के मुताबिक, तुकाराम मुंढे के इंस्टाग्राम पर करीब 34.15 लाख फॉलोअर्स हैं. वहीं, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के करीब 29.02 लाख और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के करीब 13.01 लाख फॉलोअर्स हैं.

चलिए एक नजर इन आंकड़ों पर मारते हैं.

तुकाराम मुंडे
इंस्टाग्राम फॉलोअर्स: 34.15 लाख (3.415 मिलियन)
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एंगेजमेंट रेट: 20.35 प्रतिशत

देवेंद्र फडणवीस
इंस्टाग्राम फॉलोअर्स: 29.02 लाख (2.902 मिलियन)
एंगेजमेंट रेट: 0.50 प्रतिशत

एकनाथ शिंदे
इंस्टाग्राम फॉलोअर्स: 13.01 लाख (1.301 मिलियन)
एंगेजमेंट रेट: 0.24 प्रतिशत

इंस्टाग्राम पर तुकाराम मुंढे का प्रदर्शन
तुकाराम मुंढे ने 60 दिनों के दौरान अपेक्षाकृत कम पोस्ट किए. उन्होंने इस अवधि में केवल 13 पोस्ट किए. इसके बावजूद उनके पोस्ट पर लोगों की सक्रियता 20.35 प्रतिशत रही. यह सीएम फडणवीस के 0.50 प्रतिशत और एकनाथ शिंदे के 0.24 प्रतिशत एंगेजमेंट रेट से काफी ज्यादा है.

लोकप्रियता की क्या वजह
बड़े राजनीतिक नेताओं को पीछे छोड़ने के अलावा, पुणे मिरर और टाइम्स नाउ बाटम्या जैसे मीडिया चैनलों की ओर से साझा की गई रिपोर्टों के अनुसार, डिजिटल लोकप्रियता के मामले में तुकाराम मुंढे कई चर्चित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से भी आगे हैं. इनमें समीर वानखेड़े और विश्वास नांगरे पाटील जैसे अधिकारी शामिल हैं.
तुकाराम मुंढे की बड़ी सोशल मीडिया पहुंच वायरल वीडियो, रील्स और यूजर्स द्वारा बनाए गए उन पोस्ट से बढ़ी है, जिनमें उनकी सख्त प्रशासनिक कार्यशैली और खाद्य सुरक्षा को लेकर की जा रही कड़ी कार्रवाई का समर्थन किया जाता है.

कौन हैं तुकाराम मुंढे?
तुकाराम मुंढे का पूरा नाम तुकाराम हरिभाऊ मुंढे है. वह 2005 बैच के महाराष्ट्र कैडर के चर्चित भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं. वह मई 2026 से महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के कमिश्नर के तौर पर काम कर रहे हैं. उन्होंने पूरे भारत में एक निडर, समझौता नहीं करने वाले और बेहद अनुशासित अधिकारी के तौर पर पहचान बनाई है.

तुकाराम मुंढे इतने लोकप्रिय क्यों हैं?

सरकारी अधिकारी के लिए इतनी बड़ी संख्या में लोगों का समर्थन मिलना ऐतिहासिक रूप से दुर्लभ है. तुकाराम मुंढे की बड़ी लोकप्रियता उनकी नियमों के मुताबिक और सख्त प्रशासनिक कार्यशैली से जुड़ी है. महाराष्ट्र FDA की जिम्मेदारी संभालने के बाद से तुकाराम मुंढे ने खाने में मिलावट और रसोई में साफ-सफाई की खराब स्थिति के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू की है.
उनकी टीम ने 3,000 से ज्यादा छापे मारे हैं. इसके कारण कई बड़े अंतरराष्ट्रीय और भारतीय फास्ट-फूड आउटलेट्स को अस्थायी रूप से बंद किया गया या उनके लाइसेंस निलंबित किए गए. अचानक किए जाने वाले उनके किचन निरीक्षण के वीडियो अक्सर सोशल मीडिया पर वायरल हो जाते हैं. इन वीडियो में वह खाने को गलत तरीके से रखने, कीड़े-मकौड़े और एक्सपायर हो चुके सामान जैसी चीजों को सामने लाते हुए दिखाई देते हैं.

उन्होंने रेस्टोरेंट में मुफ्त और सुरक्षित पीने का पानी अनिवार्य करने, ज्यादा रसायनों से बनाए जाने वाले नकली यानी ‘एनालॉग’ पनीर पर रोक लगाने और वड़ा पाव को ज्यादा स्याही वाले अखबारों में लपेटने की पुरानी परंपरा पर रोक लगाने को लेकर भी सुर्खियां बटोरी हैं.

25 बार तबादला होने वाले ‘सिंघम’
तुकाराम मुंढे को बार-बार तबादले होने की वजह से भारतीय नौकरशाही का ‘सिंघम’ कहा जाता है. करीब 21 साल के करियर में उनका 25 बार तबादला हो चुका है. अक्सर राजनीतिक व्यवस्था सख्त अधिकारियों को किनारे करने के लिए उनका तबादला करती है. लेकिन जनता तुकाराम मुंढे के बार-बार तबादलों को सम्मान की बात मानती है. इससे एक ऐसे ईमानदार अधिकारी के रूप में उनकी छवि मजबूत हुई है, जो राजनीतिक दबाव, कारोबारी लॉबिंग या भ्रष्टाचार के आगे झुकने से इनकार करता है.

तुकाराम मुंढे को सरकारी संस्थानों के साथ भी निजी संस्थानों जैसा ही व्यवहार करने के लिए लोगों से काफी प्रशंसा मिली है. खाद्य सुरक्षा को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट की एक टिप्पणी के बाद उन्होंने तुरंत निरीक्षण टीमों को बॉम्बे हाई कोर्ट और राज्य सचिवालय यानी मंत्रालय के अंदर मौजूद कैंटीनों की जांच के लिए भेजा. नियमों का पालन नहीं करने वाली कैंटीनों को अस्थायी रूप से बंद भी किया गया. इससे सार्वजनिक तौर पर एक ऐसा उदाहरण सामने आया कि राज्य के बड़े और प्रभावशाली लोगों के संस्थानों पर भी वही कानूनी नियम लागू होते हैं, जो आम दुकानदारों पर लागू होते हैं

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