

पांचवें वर्ष में पहुंचा महारानी किड्स क्लब का आयोजन, युवाओं ने खुद तैयार किया झोपड़ी थीम वाला पंडाल; बच्चों को मंच देकर निखार रहे प्रतिभा

संवाददाता: प्रिंस गुप्ता, भदोही
भदोही। शक्ति की उपासना, बुराई पर अच्छाई की जीत और सामाजिक एकता का संदेश देने वाला शारदीय नवरात्र केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का भी प्रतीक है। इसी आस्था और परंपरा को आगे बढ़ाते हुए चकसैफ की महारानी किड्स क्लब का नवरात्रि महोत्सव इस वर्ष पांचवें वर्ष में पहुंच गया है।
खास बात यह है कि यहां पूजा की तैयारियों से लेकर पंडाल की सजावट तक की जिम्मेदारी क्षेत्र के युवा खुद संभालते हैं। बिना बाहरी चंदे के आपसी सहयोग से आयोजित होने वाला यह महोत्सव धार्मिक आयोजन के साथ बच्चों की प्रतिभा को मंच देने का माध्यम भी बन रहा है।
महिषासुर पर विजय से जुड़ी है
मां दुर्गा की उपासना की परंपरा
भारतीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा को शक्ति, साहस और धर्म की रक्षा का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथा के मुताबिक, महिषासुर नामक असुर के अत्याचार से देवता परेशान थे। इसके बाद देवी दुर्गा ने उससे युद्ध किया और उसका वध कर धर्म की रक्षा की।
इसी मान्यता के आधार पर नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नौ दिनों तक चलने वाला यह पर्व श्रद्धालुओं को शक्ति, संयम, साहस और सकारात्मकता का संदेश देता है।
नवरात्र के दसवें दिन
विजयादशमी मनाई जाती है, जिसे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में यह पर्व अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है। कहीं दुर्गा पूजा के भव्य पंडाल सजते हैं तो कहीं रामलीला और रावण दहन के माध्यम से धर्म की विजय का संदेश दिया जाता है।
भक्ति के साथ रचनात्मकता की झलक
चकसैफ में महारानी किड्स क्लब का आयोजन धार्मिक उत्साह के साथ स्थानीय युवाओं की रचनात्मकता को भी सामने ला रहा है। इस वर्ष समिति ने झोपड़ी की थीम पर आकर्षक पंडाल तैयार किया है। इसकी खासियत यह है कि पंडाल के निर्माण और सजावट में युवाओं ने खुद मेहनत की है। मां दुर्गा की प्रतिमा भी हाथों से तैयार की गई है।
सीमित संसाधनों के बीच तैयार किया गया यह पंडाल युवाओं की कल्पनाशीलता और सामूहिक प्रयास को दर्शाता है। समिति के सदस्य पूजा से जुड़ी व्यवस्थाओं से लेकर सजावट तक में अपना योगदान देते हैं। आयोजन के लिए बाहरी चंदा नहीं लिया जाता, बल्कि सदस्य आपसी सहयोग से खर्च उठाते हैं।
डांस और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से निखरती है बच्चों की प्रतिभा
महारानी किड्स क्लब की पहचान केवल दुर्गा पूजा तक सीमित नहीं है। समिति नवरात्र के दौरान बच्चों और युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर भी देती है। इसके लिए नृत्य प्रतियोगिताओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और अन्य गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। इनमें बच्चे उत्साह के साथ भाग लेते हैं।
प्रतियोगिताओं में शामिल बच्चों का हौसला बढ़ाने के लिए प्रमाणपत्र, मेडल, ट्रॉफी और उपहार देकर सम्मानित किया जाता है। समिति का मानना है कि बच्चों को कम उम्र में मंच मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और उन्हें अपनी प्रतिभा पहचानने का अवसर मिलता है। धार्मिक आयोजन के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों को जोड़ने का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ना भी है।
पांच वर्षों की यात्रा में युवाओं का सहयोग बना आधार
पिछले चार वर्षों से लगातार आयोजित हो रहा यह महोत्सव अब पांचवें वर्ष में पहुंच गया है। इस दौरान क्षेत्र के युवाओं ने मिलकर आयोजन को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है। पूजा की तैयारी, पंडाल निर्माण, सजावट और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के संचालन में सदस्य अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं।
समिति के संस्थापक शशांक मौर्य के अनुसार, मां की भक्ति के साथ बच्चों की प्रतिभा को नई उड़ान देना क्लब का मुख्य उद्देश्य है। आपसी सहयोग और युवाओं की मेहनत से महोत्सव को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से परिवार सहित पहुंचकर मां दुर्गा के दर्शन करने और बच्चों व युवाओं का उत्साह बढ़ाने की अपील की।
आस्था के साथ सामाजिक एकता का संदेश
चकसैफ का यह आयोजन बताता है कि धार्मिक पर्व केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं होते। इनके माध्यम से समाज में आपसी सहयोग, सांस्कृतिक जुड़ाव और नई पीढ़ी को आगे बढ़ने के अवसर भी मिलते हैं।
महारानी किड्स क्लब के युवा अपने प्रयासों से इसी भावना को आगे बढ़ा रहे हैं। पांचवें वर्ष में पहुंचा यह महोत्सव स्थानीय स्तर पर भक्ति, रचनात्मकता और सामूहिक सहभागिता का संगम बन रहा है।