
वाराणसी | 2 अप्रैल 2026

हनुमान जयंती के अवसर पर गुरुवार को काशी का दक्षिणी इलाका पूरी तरह भक्तिमय हो उठा। श्री हनुमत् सेवा समिति (नेवादा) की ओर से आयोजित 23वीं श्री हनुमान ध्वज यात्रा में करीब 25 हजार श्रद्धालु शामिल हुए। लगभग दो किलोमीटर लंबी कतार में 7 राज्यों से आए भक्तों ने बजरंग ध्वजा उठाकर प्रभु श्रीराम और हनुमान जी के जयघोष से वातावरण गुंजायमान कर दिया।
भक्ति और उत्साह से हुआ यात्रा का शुभारंभ
भिखारीपुर तिराहे से यात्रा का शुभारंभ हुआ, जहां 11 ब्राह्मणों ने 60 फीट लंबे रथ पर विराजमान राम दरबार और पालकी में स्थापित हनुमान जी का विधिवत पूजन किया। इसके बाद 100 से अधिक डमरुओं और ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच यात्रा संकट मोचन मंदिर की ओर रवाना हुई। रास्ते भर श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था।

1100 गदाधारी भक्त और आकर्षक झांकियां बनीं केंद्र
यात्रा में 1100 भक्त हाथों में गदा लेकर चल रहे थे, जो बजरंगबली की शक्ति और साहस का प्रतीक बने। वहीं कोनिया कार्यालय की नारी वाहिनी ने तलवार और दंड प्रदर्शन कर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। नेवादा से अघोरी दल, जानकीनगर से गर्भगृह की प्रतिकृति और बजरडीहां से आए मध्य प्रदेश के तहलका धमाल बैंड की झांकियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं।
सेवा और प्रसाद वितरण की रही विशेष व्यवस्था
करीब 5.25 किलोमीटर लंबे मार्ग पर भक्तों के लिए जगह-जगह सेवा शिविर लगाए गए। 200 से अधिक स्टॉलों पर जूस, लस्सी, छाछ, फल और मेवे वितरित किए गए। समिति की ओर से 501 किलोग्राम शुद्ध लड्डू का महाप्रसाद भी भक्तों में बांटा गया। कड़ी धूप के बावजूद बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियां नंगे पांव हाथों में ध्वज और पूजन थाली लिए यात्रा में शामिल रहीं।
मांस-मदिरा मुक्त काशी का लिया संकल्प
यात्रा के दौरान “अभियान पवित्र काशी” के तहत काशी को मांस और मदिरा मुक्त बनाने का संकल्प भी लिया गया। इस संदेश को लेकर विशेष झांकी भी निकाली गई, जिसने श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया।
संत-महंत और गणमान्य लोग रहे मौजूद
यात्रा में कई संत-महंत और गणमान्य लोग मौजूद रहे। प्रमुख रूप से डॉ. चंद्रमौली उपाध्याय, डॉ. एस.एन. सिंह, डॉ. गिरीश चंद तिवारी, डॉ. सुभाष पांडे और डॉ. विनय पांडे सहित अन्य लोग शामिल हुए। कार्यक्रम के सफल आयोजन में समिति के अध्यक्ष रामबली मौर्य, कोषाध्यक्ष अजय मौर्य, संरक्षक डॉ. संतोष ओझा और अन्य पदाधिकारियों की अहम भूमिका रही।