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उन्नाव में CBI का बड़ा एक्शन: PMEGP लाभार्थी से 35 हजार रिश्वत मांगने का आरोप, 25 हजार लेते पोस्ट ऑफिस कर्मचारी गिरफ्तार

Hamari sevaye

उन्नाव। सरकारी योजना के तहत कारोबार शुरू करने के लिए ऋण लेने वाले लाभार्थी से कथित रिश्वत मांगने के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने उन्नाव में कार्रवाई की है। बीघापुर पोस्ट ऑफिस में तैनात ऑफिस असिस्टेंट कमल को CBI ने कथित तौर पर 25 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया है।

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10 लाख का लिया था लोन, 3.49 लाख की सब्सिडी

CBI के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने बेकरी शुरू करने के लिए उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक, भगवंत नगर से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत 10 लाख रुपये का ऋण लिया था। योजना के अंतर्गत मिलने वाली 3 लाख 49 हजार 500 रुपये की सब्सिडी भी उसके बैंक खाते में जमा हो चुकी थी।

वेरिफिकेशन के नाम पर 35 हजार रुपये मांगने का आरोप

आरोप है कि बीघापुर पोस्ट ऑफिस में तैनात ऑफिस असिस्टेंट कमल ने लोन से संबंधित यूनिट के सत्यापन के नाम पर शिकायतकर्ता से 35 हजार रुपये की कथित रिश्वत मांगी। शिकायतकर्ता ने इसकी जानकारी CBI को दी।

शिकायत के बाद CBI ने बिछाया जाल

CBI ने शिकायत के आधार पर 7 अगस्त 2026 को मामला दर्ज किया। इसके बाद कथित रिश्वत मांग की पुष्टि और ट्रैप कार्रवाई की तैयारी की गई। अगले दिन 8 अगस्त को जांच एजेंसी ने निर्धारित योजना के तहत जाल बिछाया।

25 हजार रुपये लेते ही गिरफ्तारी

CBI के अनुसार, ट्रैप के दौरान आरोपी ऑफिस असिस्टेंट कमल को शिकायतकर्ता से 25 हजार रुपये लेते हुए रंगेहाथ पकड़ लिया गया। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। जांच एजेंसी अब मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।

यूनिट वेरिफिकेशन में भूमिका की जांच

CBI यह पता लगाने में जुटी है कि PMEGP के तहत यूनिट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया में आरोपी की क्या भूमिका थी और कथित रिश्वत की मांग किस आधार पर की गई। मामले में अन्य संभावित संलिप्तता की भी जांच की जा सकती है।

लखनऊ की अदालत में होगी पेशी

CBI के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी को लखनऊ की सक्षम अदालत में पेश किया जाएगा। मामले में भ्रष्टाचार से संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई जारी है।

सरकारी योजना की निगरानी पर सवाल

PMEGP जैसी योजनाओं का उद्देश्य लोगों को स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि किसी लाभार्थी से सत्यापन के नाम पर कथित रिश्वत मांगी जाती है, तो इससे सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठते हैं।

हालांकि, CBI की जांच अभी जारी है और आरोपी पर लगाए गए आरोप अदालत में साबित होना बाकी हैं।

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