
- बीज गुणन और व्यावसायिक उपयोग के लिए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय और ओलम्पस क्रॉप केयर लिमिटेड के बीच समझौता

वाराणसी, 3 सितंबर 2026: अनुसंधान और नवाचार को समाज तक ले जाने के अपने प्रयासों की दिशा में एक और उपलब्धि हासिल करते हुए काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संस्थान द्वारा विकसित मूंग की उच्च-प्रोटीन और उच्च तापमान में भी बेहतर प्रदर्शन करने वाली प्रजाति HUM 27 (मालवीय जनक्रांति) की प्रौद्योगिकी को उद्योग को हस्तांतरित की गई है। इस संबंध में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय द्वारा औद्योगिक साझेदार ओलम्पस क्रॉप केयर लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिसके माध्यम से HUM 27 का बड़े पैमाने पर उत्पादन और बाजार में व्यावसायिक उपलब्धता का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा।

कृषि विज्ञान संस्थान के आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग द्वारा विकसित HUM 27 में किसानों के लिए कई महत्वपूर्ण विशेषताएँ हैं। इनमें उच्च प्रोटीन सामग्री, अधिक गर्मी के लिए अनूकूलता, कम अवधि में तैयार होने वाली फसल, बड़े आकार के बीज तथा मूंग पीला चित्तवर्ण रोग के प्रति प्रतिरोधक क्षमता शामिल हैं। इस प्रजाति को सितंबर 2023 में भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से आधिकारिक रूप से जारी किया गया था।
औद्योगिक साझेदार के साथ समझौता ज्ञापन पर विश्वविद्यालय की ओर से कुलसचिव श्री राजन श्रीवास्तव और ओलम्पस क्रॉप केयर लिमिटेड के प्रतिनिधि के रूप में सूद सीड प्राइवेट लिमिटेड के मार्केटिंग हेड लक्ष्मी नारायण दास गुप्ता द्वारा कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए।
कुलपति ने विश्वविद्यालय में विकसित कृषि नवाचारों के लाइसेंसिंग और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। कृषि विज्ञान संस्थान द्वारा इस दिशा में की गई प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने विश्वविद्यालय में विकसित प्रजातियों को प्रयोगशालाओं और अनुसंधान खेतों से निकालकर समाज तक पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने फसलों से संबंधित विश्वविद्यालय के नवाचारों के व्यापक स्तर पर प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की संभावनाओं को भी रेखांकित किया।
HUM 27 के वर्तमान प्रजनक डॉ. अनिल सिंह ने इस प्रजाति की विशेषताओं और ग्रीष्मकालीन खेती में इसकी संभावनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि HUM 27 को प्रमुख फसल मौसमों के बीच उपलब्ध कम अवधि का उत्पादक उपयोग करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। इसकी तापक्रम सहनशीलता, कम अवधि, बड़े बीज और उच्च प्रोटीन सामग्री का संयोजन इसे कुशल और जलवायु-सहिष्णु फसल उत्पादन के लिए विशेष रूप से उपयोगी बनाता है।
इस दौरान कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. वी. के. मिश्रा, आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एस. के. सिंह, बौद्धिक संपदा अधिकार एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (IPRTT) प्रकोष्ट की अध्यक्ष प्रो. गीता राय, तथा सदस्य डॉ. जे. पी. वर्मा, डॉ. किरण राजेंद्र गिरी, डॉ. प्रभात कुमार साहा और डॉ. अभिषेक दत्त त्रिपाठी भी उपस्थित रहे।
प्रकोष्ठ विश्वविद्यालय में विकसित प्रौद्योगिकियों को उद्योग तक पहुँचाने की प्रक्रिया को सुगम बनाने वाली नोडल इकाई के रूप में कार्य करता है। प्रो. गीता राय ने कहा कि यह इकाई विश्वविद्यालय द्वारा विकसित नवाचारों को ऐसी प्रौद्योगिकियों और समाधानों में परिवर्तित करने की दिशा में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है, जो समाज के लिए लाभकारी हों।
HUM 27 की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक इसकी अत्यधिक गर्मी सहन करने की क्षमता है। यह प्रजाति 45°C तक के तापक्रम को सहन करने में सक्षम है। इस कारण यह रबी और खरीफ फसलों के बीच उपलब्ध ग्रीष्मकालीन अवधि के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है। इससे सिंचाई की सुनिश्चित सुविधा वाले किसान गेहूँ या सरसों जैसी फसलों की कटाई के बाद सामान्यतः खाली रहने वाले खेतों में भी मूंग की खेती कर सकते हैं। इसके लिए आदर्श बुवाई अवधि 10 से 25 मार्च है।
यह प्रजाति 62 से 76 दिनों में तैयार हो जाती है। इसकी औसत उत्पादकता 9 क्विंटल प्रति हेक्टेयर, जबकि दर्ज की गई अधिकतम उत्पादकता 18 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। लगभग 44 सेंटीमीटर की इसकी कॉम्पैक्ट पौध संरचना लॉजिंग (पौधों के गिरना व झुकना) की समस्या को कम करने में मदद करती है। इसके बड़े, चमकीले हरे बीजों का वजन लगभग 5 ग्राम प्रति 100 बीज है, जिससे अनाज तथा प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों (नमकीन आदि) के बाजार में इसकी अच्छी संभावनाएँ बनती हैं। पोषण की दृष्टि से भी HUM 27 महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें 28.9 प्रतिशत प्रोटीन की उपलब्धता है।
ओलम्पस क्रॉप केयर लिमिटेड बाजार में इस प्रजाति को उतारने से पहले आवश्यक बीज गुणन प्रक्रिया को पूरा करेगी। यह प्रौद्योगिकी हस्तांतरण विश्वविद्यालय के उन प्रयासों की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है, जिनके माध्यम से कृषि अनुसंधान और पादप प्रजनन से जुड़े नवाचारों को ऐसी प्रौद्योगिकियों में बदला जा सके, जिनका किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिले।
HUM 27 के विकास में कृषि विज्ञान संस्थान के डॉ. अनिल सिंह, डॉ. एम. एन. सिंह, डॉ. रमेश चंद्र, डॉ. प्रेम शंकर सिंह और श्री दिनेश कुमार का योगदान रहा है।
सम्पर्क सूत्रः डॉ. अनिल कुमार सिंह – 9451963365