

बकरे के मांस के नाम पर भैंस का मांस परोसने के आरोप, जिम्मेदार विभाग की निगरानी पर उठे सवाल

आनंद सिंह | शुक्लागंज, उन्नाव
शुक्लागंज क्षेत्र में मटन से बने खाद्य पदार्थों में कथित मिलावट को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि कुछ दुकानों और खाद्य प्रतिष्ठानों पर बकरे के मांस से बने व्यंजन के नाम पर अन्य मांस मिलाकर ग्राहकों को परोसा जा रहा है। यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह मामला केवल उपभोक्ता के साथ धोखाधड़ी तक सीमित नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा और धार्मिक भावनाओं से जुड़ा गंभीर विषय भी बन सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मटन करी, मटन कोरमा, कीमा, बिरयानी, कबाब, कलेजी, सींक बोटी,मटन स्टू सहित बकरे के मांस से तैयार होने वाले विभिन्न व्यंजनों में मांस की गुणवत्ता और स्रोत की जांच जरूरी है। आरोप है कि बकरे के मांस की कीमत वसूलकर ग्राहकों को दूसरे पशु का मांस दिए जाने की आशंका के बावजूद प्रभावी जांच नहीं हो रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि खाद्य प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाले मांस की वास्तविक पहचान और गुणवत्ता की जांच आखिर किस स्तर पर की जा रही है। यदि किसी ग्राहक को बकरे के मांस के नाम पर दूसरा मांस बेचा जाता है तो यह सीधे तौर पर उपभोक्ता के विश्वास के साथ खिलवाड़ होगा। वहीं, धार्मिक मान्यताओं से जुड़े उपभोक्ताओं के लिए इसकी गंभीरता और बढ़ जाती है।
जांच के बिना आरोपों की पुष्टि संभव नहीं
मामले में यह भी महत्वपूर्ण है कि केवल आशंका या शिकायत के आधार पर किसी दुकानदार को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। मांस की प्रजाति की पुष्टि वैज्ञानिक जांच और अधिकृत खाद्य परीक्षण के माध्यम से ही हो सकती है। इसलिए संबंधित विभाग द्वारा नमूने लेकर उनकी प्रयोगशाला जांच कराई जाए और रिपोर्ट के आधार पर ही कार्रवाई की जाए।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
स्थानीय लोगों की मांग है कि खाद्य सुरक्षा विभाग क्षेत्र में मटन और मांस से बने खाद्य पदार्थों की बिक्री करने वाले प्रतिष्ठानों की नियमित जांच करे। मांस के स्रोत, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड, लाइसेंस, स्वच्छता और खाद्य मानकों की भी जांच हो। शिकायत सही पाए जाने पर संबंधित कानूनों के तहत कठोर कार्रवाई की जाए।
मामले ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि अगर मुनाफे के लिए खाद्य पदार्थों में मिलावट की जा रही है तो जिम्मेदार विभाग की निगरानी व्यवस्था आखिर कितनी प्रभावी है? अब जरूरत आरोप-प्रत्यारोप की नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और तथ्य सामने लाने की है।