

वाराणसी। प्राचीन श्रीराम लीला समिति खोजवा की रामलीला में बुधवार को श्रीराम के गंगा और यमुना नदी पार कर चित्रकूट पहुँचने के प्रसंग मंचित किये गए। वन में जाने के लिए जब राम गंगा तट पर पहुंचे और केवट को नाव लाकर पार उतारने को कहा तो उसने साफ इंकार कर दिया। प्रभु के चरण कमल की महिमा कहते हुए बिना पांव धोए पार न उतारने की हठ करने लगा। केवट की बात सुनकर राम सीता की ओर देखकर मुस्कुराए उन्होंने उसे पांव धोने की आज्ञा दे दी। केवट कठौते में गंगाजल भरकर लाया और पांव पखारकर चरणामृत लेने के बाद उन्हें नाव में बैठाकर पार उतारा। यह देखकर देवता जय जयकार करते हैं। पार उतार कर जब राम उसे मुंदरी देकर उतराई देते हैं तो केवट लेने से इनकार कर देता है। केवट कहता है कि लौटते समय आप जो देंगे वह मैं प्रसाद समझकर रख लूंगा। गंगा पार उतर कर राम निषाद राज से घर वापस जाने को कहते हैं। निषादराज चार दिन और सेवा का अवसर मांगते हैं। सभी को साथ लेकर राम प्रयाग पहुंचे। वहां त्रिवेणी में स्नान करने के बाद वह भारद्वाज मुनि के पास पहुंचे। वहां रात्रि विश्राम करने के बाद प्रातः उठकर वन में आगे जाने का मार्ग पूछते हैं। मुनि के शिष्य उन्हें यमुना के पास पहुंचाते हैं। यमुना पार करके वे ग्राम वासियों से मिलते हैं।
