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अवैध पटाखा का बारूदी विस्फोट, तीन मंजिला मकान जमींदोज

Hamari sevaye

तीन गंभीर समेत आधा दर्जन से अधिक घायल, आसपास के मकानों को भी भारी नुकसान

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वर्षों से चल रहा था पटाखे बनाने का खेल, स्थानीय लोगों ने पुलिस पर लगाया अनदेखी का आरोप

मां बेटे फरार, एटीएस ने संभाली जांच की कमान

वाराणसी। सारनाथ थाना क्षेत्र के पंचक्रोशी में गुरुवार की शाम करीब छह बजे बारूद के कथित अवैध कारोबार ने ऐसा विस्फोटक रूप लिया कि तीन मंजिला मकान देखते ही देखते मलबे में तब्दील हो गया। धमाका इतना जबरदस्त था कि आसपास के कई मकानों के हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए। धमाके की आवाज से पूरा इलाका दहल उठा। घरों से लोग जान बचाकर बाहर भागे तो गलियों में चीख-पुकार और अफरातफरी मच गई। मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए पुलिस, एनडीआरएफ और दमकल की टीमों को मोर्चा संभालना पड़ा। तीन गंभीर घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि आधा दर्जन से अधिक लोगों ने विभिन्न अस्पतालों में उपचार कराया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कारोबार की जानकारी पुलिस को पहले से थी और कई बार शिकायत भी की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

बारूद के ढेर पर आबाद थी बस्ती!

जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में ‘मुन्नी पटाका वाली’ के नाम से चर्चित शहदून निशा और उसका बेटा राजू खान कथित तौर पर पटाखे बनाने और उसके कारोबार से जुड़े थे। बताया जाता है कि मकान में कई वर्षों से पटाखा बनाने का काम किया जा रहा था। गुरुवार की शाम हुए भीषण विस्फोट में राजू खान का तीन मंजिला मकान पूरी तरह ढह गया। धमाके के बाद शहदून निशा और राजू खान के मौके से फरार होने की बात सामने आई। विस्फोट की सूचना मिलते ही सारनाथ पुलिस के साथ कई थानों की फोर्स और वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। मलबे में लोगों के दबे होने की आशंका के बीच बचाव अभियान चलाया गया। पुलिस, एनडीआरएफ और दमकल की टीमों ने राहत कार्य में सहयोग किया। घटना की गंभीरता को देखते हुए आतंकवाद निरोधक दस्ता भी मौके पर पहुंचा और जांच शुरू कर दी।

एक धमाका, कई मकानों पर कहर

विस्फोट का असर केवल राजू खान के मकान तक सीमित नहीं रहा, आसपास के मकानों को भी नुकसान पहुंचा। राजू खान के मकान के सामने स्थित चंद्रकला विश्वकर्मा के घर का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कुछ देर तक धूल और धुएं के कारण आसपास कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। चंद्रकला के बेटे प्रयंक विश्वकर्मा ने बताया कि घटना के समय वह घर में अकेला था। अचानक सामने स्थित मकान में जोरदार विस्फोट हुआ। देखते ही देखते पूरे इलाके में धूल और धुआं भर गया तथा बारूद की गंध फैल गई। कुछ देर बाद जब धुंध छंटी तो सामने का मकान पूरी तरह ध्वस्त दिखाई दिया तथा मेरे घर का अगला हिस्सा भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था।

खेल रही थी 13 वर्षीय नैना, अचानक आ गिरा आग का गोला

इस विस्फोट ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी भयावह तस्वीर सामने आई। राजू खान के मकान से कुछ दूरी पर रहने वाले राकेश कुमार की 13 वर्षीय पुत्री नैना मोदनवाल घटना के समय खेल रही थी। तभी तेज धमाका हुआ और आग का एक गोला उसके पास आ गिरा। इससे उसके गाल, पैर और बाल झुलस गए।
घनी आबादी के बीच कथित तौर पर बारूद और पटाखों का भंडारण कितना बड़ा खतरा बन सकता है, नैना के साथ हुई घटना इसका भयावह उदाहरण है। यदि विस्फोट के समय आसपास मौजूद लोग इसकी चपेट में आ जाते, तो नुकसान कहीं अधिक गंभीर हो सकता था।

प्रत्यक्षदर्शी को लगा, भूकंप आ गया

घटना की प्रत्यक्षदर्शी आशा प्रजापति ने बताया कि वह मंदिर जाने के लिए घर से निकल रही थीं। इसी दौरान अचानक जोरदार धमाका हुआ। आवाज और कंपन इतना तेज था कि उन्हें लगा मानो भूकंप आ गया हो। चारों तरफ धूल छा गई और कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। थोड़ी देर बाद जब धूल हटी तो पता चला कि राजू खान का मकान ढह चुका है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विस्फोट के बाद इलाके में दहशत का माहौल था। लोग अपने परिजनों को तलाशने और घायलों की मदद करने में जुट गए। क्षतिग्रस्त मकानों और मलबे के बीच राहत एवं बचाव कार्य शुरू हुआ।

25 वर्षों से रह रहा था शहदून निशा का परिवार

क्षेत्रीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, शहदून निशा और राजू खान का परिवार करीब 25 वर्षों से पंचक्रोशी क्षेत्र में रह रहा था। राजू के बड़े भाई सलीम का मकान भी उसके घर के पीछे बताया जाता है। दोनों भाई पटाखों के कारोबार से जुड़े थे। यह भी बताया कि राजू खान के पिता की मौत भी पहले पटाखों के अवैध कारोबार के दौरान हुई थी।

पुलिस की भूमिका पर सवाल

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि राजू खान के कथित अवैध कारोबार की जानकारी स्थानीय पुलिस को कई बार दी गई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। एटीएस की टीम घटनास्थल पर जांच कर रही है। विस्फोट का वास्तविक कारण, मकान में रखी सामग्री, पटाखा निर्माण और भंडारण की वैधता तथा सुरक्षा नियमों के पालन जैसे पहलुओं की पड़ताल आवश्यक है। स्थानीय लोगों द्वारा पुलिस से की गई शिकायतों की भी जांच जरूरी है।

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