
वाराणसी। निजी अस्पताल में कार्यरत रहने के दौरान मरीजों का आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए उनसे धोखाधड़ी कर पैसा लेकर कूटरचित और फर्जी आयुष्मान कार्ड देने के मामले में दो आरोपतों को कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई। विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) पूनम पाठक की अदालत ने सकलडीहा, चंदौली निवासी आरोपित मंगल प्रसाद व बरसठी, जौनपुर निवासी आरोपित राहुल कुमार गुप्ता को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने की दशा में 50-50 हजार रुपए की एक-एक जमानतदार व बंधपत्र देने पर अग्रिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल कृष्ण व अधिवक्ता विकास सिंह ने पक्ष रखा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार बादशाहबाग कॉलोनी, मलदहिया में स्थित नसेवन मेड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड अस्पताल के जनरल मैनेजर रत्नेश कुमार राय ने अदालत में बीएनएनएस की धारा 173(4) के तहत प्रार्थना पत्र दिया था। आरोप था कि दोनों आरोपित मंगल प्रसाद व राहुल गुप्ता उसके अस्पताल सेवन मेड इंडिया प्राईवेट लिमिटेड (दिल्ली आधारित) में विभिन्न पदों पर कार्यरत थे। इस दौरान दोनों आरोपितों द्वारा अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर अस्पताल में कार्य करने के कोई दौरान उक्त कम्पनी के मरीजों से आयुष्मान कार्ड बनवाने के नाम पर धोखाधड़ी करके मरीजों को आयुष्मान कार्ड साजिशन कूटरचित फर्जी व जाली प्रदान कर कम्पनी को अनुचित हानि एवं स्वयं को अनुचित लाभ लेने की मंशा से उनसे धनराशि प्राप्त किया गया। इस मामले में अदालत के आदेश पर पुलिस ने सभी आरोपितों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। इस मामले में आरोपित ने अधिवक्ताओं के जरिए अदालत में अग्रिम जमानत की अर्जी दी थी। जिसे सुनवाई के बाद अदालत ने मंजूर कर लिया।
