

वाराणसी: आयुष्मान कार्ड बनवाने के नाम पर मरीजों से कथित धोखाधड़ी और फर्जी कार्ड उपलब्ध कराने के मामले में आरोपित रत्नाकर सिंह को अदालत से राहत मिल गई है। विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) पूनम पाठक की अदालत ने गिरफ्तारी की स्थिति में 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और एक जमानतदार पर उन्हें अग्रिम जमानत देने का आदेश दिया।

आरोपित रत्नाकर सिंह शिवदासपुर, मंडुआडीह के निवासी हैं। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल कृष्ण तथा अधिवक्ता विकास सिंह और अमनदीप सिंह ने अदालत में पक्ष रखा।
अभियोजन के अनुसार, बादशाहबाग कॉलोनी, मलदहिया स्थित सेवन मेड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड अस्पताल के जनरल मैनेजर रत्नेश कुमार राय ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया था कि रत्नाकर सिंह समेत अन्य आरोपित अस्पताल में विभिन्न पदों पर कार्यरत थे। आरोप है कि उन्होंने मरीजों को आयुष्मान कार्ड बनवाने का झांसा देकर धनराशि ली और उन्हें कथित रूप से कूटरचित एवं फर्जी आयुष्मान कार्ड उपलब्ध कराए।
शिकायत में कहा गया था कि इस कथित कृत्य से कंपनी को आर्थिक नुकसान पहुंचा, जबकि आरोपितों ने स्वयं अनुचित लाभ प्राप्त किया। अदालत के आदेश पर पुलिस ने लक्ष्मीकांत यादव, मंगल प्रसाद, रत्नाकर सिंह, राहुल गुप्ता सहित अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी और संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।
मामले में गिरफ्तारी की आशंका के चलते रत्नाकर सिंह ने अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने उनकी याचिका स्वीकार करते हुए अग्रिम जमानत प्रदान कर दी।