Editor

भदोही के पंडालों को अपनी कलाकारी से जीवंत रूप देते हैं पश्चिम बंगाल के बुधदेव पाल दादा

Hamari sevaye

मार्च से शुरू होता है प्रतिमाओं को गढ़ने का काम, नवरात्र तक दिन-रात मेहनत कर तैयार करते हैं मां दुर्गा की प्रतिमाएं; त्योहारों के सकुशल संपन्न होने पर अंगवस्त्र भेंटकर किया गया सम्मान

VK Finance

संवाददाता: प्रिंस गुप्ता, भदोही।

भदोही। आस्था, कला और साधना का संगम जब मूर्तिकार के हाथों आकार लेता है, तो मां दुर्गा की प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण और श्रद्धा का केंद्र बन जाती है। भदोही में दुर्गा पूजा के दौरान सजने वाले कई प्रमुख पंडालों की प्रतिमाओं को आकर्षक स्वरूप देने में पश्चिम बंगाल निवासी मूर्तिकार बुधदेव पाल दादा का महत्वपूर्ण योगदान है। उनकी कलाकारी, मेहनत और सरल व्यवहार ने उन्हें भदोही के दुर्गा पूजा आयोजनों से विशेष रूप से जोड़ रखा है। शारदीय नवरात्र, दशहरा और ऐतिहासिक भरत मिलाप सहित सभी त्योहारों के सकुशल संपन्न होने के बाद श्री दुर्गा पूजा महासमिति भदोही और श्री मेन रोड दुर्गा पूजा समिति के पदाधिकारियों ने उन्हें अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया।

सम्मान करते हुए श्री दुर्गा पूजा महासमिति भदोही के अध्यक्ष अशोक कुमार जायसवाल, श्री मेन रोड दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष विनय गुप्ता, महामंत्री प्रिंस गुप्ता तथा सभासद करुणा शंकर दुबे ने बुधदेव पाल दादा की कलाकारी की सराहना करते हुए उन्हें सम्मानित किया। इस दौरान सभी ने त्योहारों के सफल आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त की और आगामी वर्षों में भी आपसी सहयोग, भाईचारे तथा उत्साह के साथ धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने की शुभकामनाएं दीं।

मार्च से शुरू होती है प्रतिमाओं को आकार देने की तैयारी

पश्चिम बंगाल निवासी बुधदेव पाल दादा का कारखाना भदोही के रामरायपुर बाईपास पर स्थित है। यहां वह मार्च महीने से ही अपने कारीगरों के साथ मां दुर्गा की प्रतिमाओं को तैयार करने का काम शुरू कर देते हैं। महीनों की मेहनत, बारीक कारीगरी और कलात्मक कल्पना के बाद नवरात्र के दौरान प्रतिमाएं अंतिम रूप लेती हैं। प्रतिमाओं के निर्माण में चेहरे के भाव, आंखों की बनावट, आभूषणों की बारीकियां और आकर्षक सज्जा पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

मां दुर्गा की प्रतिमा तैयार करना केवल शिल्पकला ही नहीं, बल्कि धैर्य, अनुभव और समर्पण का भी काम है। प्रतिमाओं को आकार देने से लेकर उन्हें अंतिम रूप देने तक मूर्तिकार और उनके कारीगर लगातार मेहनत करते हैं। महीनों की इस साधना का परिणाम नवरात्र के दौरान देखने को मिलता है, जब सजे-धजे पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनती हैं।

कई प्रमुख पूजा पंडालों के लिए तैयार करते हैं प्रतिमाएं

बुधदेव पाल दादा भदोही नगर के कई प्रमुख दुर्गा पूजा पंडालों के लिए प्रतिमाएं तैयार करते हैं। इनमें आईसीआईसीआई बैंक के सामने स्थित श्री मेन रोड दुर्गा पूजा समिति, हरि मंदिर दुर्गा पूजा समिति और श्री श्री दुर्गा पूजा समिति मिडिल स्कूल भदोही सहित अन्य पूजा समितियां शामिल हैं। इसके अलावा चौरी रोड की बाल शिवम दुर्गा पूजा समिति, मोढ़ बाजार, करियाव बाजार, ज्ञानपुर, गोपीगंज और सुरियावां समेत आसपास के कई क्षेत्रों के पूजा पंडालों के लिए भी वह प्रतिमाएं तैयार करते हैं।

उनकी कलाकारी से सजी प्रतिमाएं धार्मिक आयोजनों की भव्यता बढ़ाती हैं।

प्रतिमाओं का आकर्षक स्वरूप पंडालों की सजावट को विशेष पहचान देता है और दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। यही वजह है कि प्रतिवर्ष प्रतिमा निर्माण के लिए उनकी कला और अनुभव का लाभ लिया जाता है।

सरल व्यवहार और कलाकारी ने बनाई अलग पहचान

मूर्तिकार बुधदेव पाल दादा की पहचान केवल उनकी कलाकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका सरल व्यवहार भी लोगों को प्रभावित करता है। पूजा समितियों के पदाधिकारियों और कारीगरों के साथ उनके सहयोगात्मक रवैये से धार्मिक आयोजनों की तैयारियों में समन्वय बना रहता है।

भदोही में दुर्गा पूजा की परंपरा को भव्य स्वरूप देने में मूर्तिकारों और उनके कारीगरों की भूमिका महत्वपूर्ण है। प्रतिमाओं के निर्माण के पीछे उनकी कई महीनों की मेहनत रहती है, जबकि श्रद्धालु नवरात्र के दौरान उस कला का दर्शन करते हैं

बुधदेव पाल दादा जैसे कलाकार अपनी रचनात्मकता और समर्पण से धार्मिक आस्था को कलात्मक अभिव्यक्ति देते हैं।

सम्मान समारोह के दौरान पदाधिकारियों ने उनके योगदान की सराहना करते हुए कहा कि नवरात्र, दशहरा और भरत मिलाप जैसे आयोजन आपसी सहयोग, सद्भाव और सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक हैं। सभी त्योहारों के सकुशल संपन्न होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मूर्तिकार बुधदेव पाल दादा और उनके सहयोगियों के प्रति आभार जताया गया तथा भविष्य में भी इसी उत्साह के साथ धार्मिक आयोजनों को सफल बनाने की कामना की गई।

खबर को शेयर करे

Leave a Comment