
1. बिना Due Diligence के ₹25,000 करोड़ का MoU

मंत्री जी ने अपने उत्तर में स्वीकार किया है कि MoU पर हस्ताक्षर से पहले कंपनी की Due Diligence नहीं की गई थी।

प्रश्न:
यदि Due Diligence नहीं हुई, तो ₹25,000 करोड़ के निवेश का दावा किस आधार पर स्वीकार किया गया?
2. पहले MoU, बाद में जांच?
सरकार का कहना है कि MoU Non-Binding था, इसलिए विस्तृत जांच बाद में की जानी थी।
प्रश्न:
क्या उत्तर प्रदेश सरकार की नीति है कि पहले MoU किया जाए और बाद में कंपनी की विश्वसनीयता की जांच हो?
यदि हाँ, तो संबंधित शासनादेश (Government Order) सदन के पटल पर रखा जाए।
3. निवेशक की विश्वसनीयता की जांच क्यों नहीं हुई?
मंत्री जी के उत्तर के अनुसार कंपनी ने:
- वित्तीय स्रोतों की जानकारी नहीं दी।
- तकनीकी विवरण उपलब्ध नहीं कराया।
- निवेश संबंधी कोई ठोस बैकअप प्रस्तुत नहीं किया।
प्रश्न:
जब कंपनी ने मूलभूत जानकारी तक उपलब्ध नहीं कराई, तो उसे Invest UP के माध्यम से MoU तक पहुँचने की अनुमति कैसे मिली?
4. किस अधिकारी ने दी मंजूरी?
उत्तर में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि:
- फाइल किस अधिकारी ने क्लियर की?
- MoU पर हस्ताक्षर की अनुमति किसने दी?
- किस स्तर पर अंतिम अनुमोदन प्रदान किया गया?
मांग:
MoU से संबंधित पूरी File Noting और अनुमोदन प्रक्रिया सदन के पटल पर रखी जाए।
5. क्या किसी की कोई जिम्मेदारी नहीं?
मंत्री जी के उत्तर में कहा गया है कि “किसी अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई का औचित्य नहीं है।”
प्रश्न:
यदि बिना Due Diligence के इतना बड़ा MoU हुआ और बाद में निवेश आगे नहीं बढ़ा, तो इसकी प्रशासनिक जवाबदेही किसकी है?
क्या किसी अधिकारी या संबंधित संस्था की जिम्मेदारी तय की गई? यदि नहीं, तो क्यों?