
वाराणसी, 20 जुलाई। काशी अब तकनीक के सहारे और भी स्मार्ट बनने जा रही है। बाबा विश्वनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को जल्द ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डिजिटल साइनेज, स्मार्ट कैमरे और रंग-कोडेड गलियों की मदद से बिना भटके अपने गंतव्य तक पहुंचने की सुविधा मिलेगी। भीड़ का दबाव बढ़ने से पहले ही एआई सिस्टम चार घंटे पहले उसका अनुमान लगाकर प्रशासन और पुलिस को अलर्ट करेगा, जिससे समय रहते ट्रैफिक डायवर्जन और भीड़ नियंत्रण किया जा सकेगा।

टोयोटा मोबिलिटी फाउंडेशन की ‘सस्टेनेबल सिटीज चैलेंज’ के तहत दुनिया के चुनिंदा शहरों में शामिल वाराणसी में अब चार चयनित कंपनियां आधुनिक तकनीक के जरिए भीड़ प्रबंधन और सुगम आवागमन पर काम करेंगी। पायलट प्रोजेक्ट में लगाए गए आठ एआई सेंसरों की संख्या बढ़ाकर 50 से अधिक की जाएगी। ये सेंसर और कैमरे भीड़ तथा ट्रैफिक के व्यवहार का विश्लेषण कर रियल टाइम जानकारी काशी इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को भेजेंगे।
परियोजना के तहत सड़कों और गलियों में अलग-अलग रंगों की लाइनें बनाई जाएंगी। पीली लाइन श्रद्धालुओं को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, नीली लाइन गंगा घाट और लाल लाइन वापसी के पिकअप प्वाइंट तक पहुंचाएगी। डिजिटल साइनेज भीड़भाड़ वाले मार्गों से बचने के लिए वैकल्पिक रास्तों की जानकारी देंगे, जबकि म्यूरल पेंटिंग भी दिशा-निर्देश का काम करेंगी।
‘बेहतर-वे’ नामक एआई आधारित ऐप रियल टाइम डेटा के आधार पर कम भीड़ वाले रास्तों का सुझाव देगा। इसमें स्थानीय दुकानों और दर्शनीय स्थलों की जानकारी भी उपलब्ध होगी, जिससे स्थानीय व्यापारियों को भी लाभ मिलेगा।
इसके अलावा ‘नई चाल’ परियोजना के तहत अस्सी घाट से मणिकर्णिका घाट तक दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिकों और गर्भवती महिलाओं के लिए सुगम आवागमन की व्यवस्था विकसित की जाएगी। गोदौलिया से दशाश्वमेध घाट तक रैंप, व्हीलचेयर, चेंजिंग रूम और अन्य सुविधाओं की जानकारी देने वाले सूचना केंद्र भी बनाए जा रहे हैं।
नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल के अनुसार, वाराणसी स्मार्ट सिटी, नगर निगम और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के सहयोग से चल रही यह महत्वाकांक्षी परियोजना अगले दो वर्षों में पूरी होगी, जिससे काशी का भीड़ प्रबंधन और यातायात व्यवस्था विश्वस्तरीय स्तर पर पहुंच जाएगी।